अहम् ब्रह्मास्मि

बंदा बीस ग्राम अहम के साथ पैदा होता है,
“अहम् ब्रह्मास्मि” का ये Nth वाला हिस्सा होता है।

चट्टान से मजबूत, पारे से भारी होता है,
मगर हल्के से दुलार से पिघल जाता है।

दुलार स्त्री से किसी भी रूप में हो सकता है—
माँ, बहन, पत्नी, प्रेमिका, पड़ोसन…

जब अहम को चोट लगती है, बिखर जाता है,
टुकड़े-टुकड़े होकर चूर-चूर हो जाता है।

और जब टूट जाता है अहम—

System Fail!

[Chorus]
अगर अहम को कोई थाम ले—
तो तरक्की।

और अगर सिस्टम फैल गया—
तो बस…

जेल की चक्की!

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