अहम् ब्रह्मास्मि
बंदा बीस ग्राम अहम के साथ पैदा होता है,“अहम् ब्रह्मास्मि” का ये Nth वाला हिस्सा होता है। चट्टान से मजबूत,
बंदा बीस ग्राम अहम के साथ पैदा होता है,“अहम् ब्रह्मास्मि” का ये Nth वाला हिस्सा होता है। चट्टान से मजबूत,
रास्ते में मस्ती में चला जा रहा था,शायद कोई धुन गुनगुना रहा था। नज़र आए एक लड़का, एक लड़की,बारिश के
आप जन्म लेते हैं—ओके। आप बड़े होते हैं—ओके। आप कुछ लोगों के साथ बड़े होते हैं,आप कुछ चीज़ों के साथ
एक जामुन की कीमततुम क्या जानो, चुन्नी बाबू,बीमार मानसिकता और बेलगामलालच जब हो जाएँ बेकाबू। एक झुंड ही बर्बाद कर
अंकल जी दुकान खोल रहे हैं,डंडा हाथ में ले बुदबुदा रहे हैं। अभी काले कुत्ते को भगाया है,और लो—ग्राहक चला
देखे हैं हमने फ़र्ज़ी डॉक्टर बनते,पानीपुरी बेचते, फिर ओपीडी लेते। क्या करें डिग्री? क्या डिग्री के खर्चे?पानीपुरी वाले थे अब
ईश्वर के दर पर कोई लॉगिन नहीं है,लॉगिन नहीं… और लॉजिक भी नहीं है। हर होनी में कारण ढूँढना तेरी
ये फ़ासले मैंने चाहे नहीं, बनते चले गए,मैंने कहा था कुछ, तुम कुछ समझते गए। मैंने तुमसे जो कहा, तुमने
हे मॉम!ज़रा तमीज़ से पेश आओ, GenZ के चोंचले बंद करो,जो कहना है कहो, पहले मम्मी कहकर बात करो। “ओके
गरम परांठा थाली में सज कर आया तवे से उतरा आलू मसाला भर लाया काम क्रोध मद लोभ मोह साया
तुम पर चाहे मेरा हक़ अब न हो,दुआ-सलाम पर मगर अब भी है। लाख हो गए हो किसी और के,दिल
साली एंड सालीज़ आर एवरीव्हेर.. बट ट्रू सालीज़ आर रेयर.. याद है न तुम्हें, अपनी दीदी की शादी पर.. तुम
जुबां बोले जा रही थी—न रुकावट, न खेद,न ज्ञान साथ दे रहा था, न ही विवेक। जुबां ने कैंची से
प्रेम की गली में छोटा सा घर बनाएंगेखर्चा चले न चले कामवाली रखवाएंगेख्वाहिश जो हैं, हम सब खरीद लाएंगेफ्यूचर की
मेरे पड़पड़ दादाजी एक पहलवान थेखुद मजबूत मजबूती के कद्रदान थेदादा के पास खेत और खलिहान थेगांव में रखते वो
आज में गंजा हूँ कढ़ैया मंजा हूँ मेरे माथे के चूल मुरझा गए हैं डंड्रफ केमिकल मेरे जवानी के शौक
[Intro]अरे भैया, ज़रा संभल के—पीछे गड्ढा है!बच के, बच के, बच के! [Chorus][Lead]पचपन के नहीं हुए, अभी से उल्टे चलने
सर्दी लगी खांसी का झटका आया लगातार आया मगर रुक न पाया लंग्स कहे हाय मर गए मोरी मैया कहा
मुझे बाप न कहो शादी में मैं हूँ चलता फिरता एटीएम इनका शुरू होने जा रहा जीवन मेरी सेविंग ख़तम
माँ…मुझमें ये कैसी खुशबू हैजिसे सूंघकरसब मुस्कुराते हैं? बेटी…ये नए होने की खुशबू है।अभी तेरे पन्नों परवक्त की उंगलियाँ नहीं