सुबह की थाली में
सुबह की थाली मेंबिखरी लाली मेंजब में जागा हूँमेरे पास क्या हैऊपरवाले कीनेमतें क्या-क्या हैं ठंडी सुहानी हवासांसों को राहत […]
सुबह की थाली मेंबिखरी लाली मेंजब में जागा हूँमेरे पास क्या हैऊपरवाले कीनेमतें क्या-क्या हैं ठंडी सुहानी हवासांसों को राहत […]
तुमने तो कुछ कहा नहीं, नजरें बयां कर गईं। इतनी सुंदर हैं कि मेरी नजरें देखती रह गईं। तुमने तो
शादी के लिए रजामंद कर लियामैंने एक लड़का पसंद कर लिया उड़ता टिड्डा डब्बे में बंद कर लियामैंने एक लड़का
उसने कहा“सुनो”मैंने गौर नहीं कियाउसने फिर कहा“सुनो”मैंने कहा “क्या है”“सुनो” “हाँ हाँसुन तो रहा हूँबोलो भी” “मैं बता रहा हूँ,
मैं हूँ जैकी डॉसनटाइटैनिक फ़िल्म मेंमुझे आपने समंदर में डूबते हुए तो देखा होगा मुझे देखकरआपकी गलतफ़हमी दूर हो गई
भाई, कल दिल्ली कि गर्मी में तूफ़ान ने ऐसी एंट्री मारी,जैसे मोहल्ले की दो आंटियाँ बाल्टी लेकर आमने-सामने आ गई
चला जाता हूँ किसी की धुन में धड़कते दिल के तराने लिए मम्मी ने भेजा दूध लाने को पापा ने
एक वक्त था जब गुलाम खरीदे जाते थेइंसां इंसां के द्वारा गुलाम बनाए जाते थेफिर गुलाम बाजार में बिकवाए जाते
बच्चे का हाथ पकड़ता, बोरा तेरे सर रखवाता हैऐ मेरे देश की बेटी, बता इससे तेरा क्या नाता हैबोरा नहीं,
मेरी जान ऐ मेरी ज़िन्दगीशादी की सालगिरह मुबारक होआज दिल ने फिर कहा हैजो सालों से कहीं छुपा था जब
ऐ सनम ऐ मेरी ज़िन्दगीशादी की सालगिरह मुबारक होआज दिल फिर कह रहा हैजो सालों से मैं कहती हूँ जब
[Verse 1]किस लम्बू के चक्कर में पड़ी आपादेख तू इसकी आधी हैघरवालों ने ठग लिया तुझे,या खुद ही की इससे
तावड़े को बिंदास बनने की बड़ी जल्दी थीमुंबई क़दमों पर ले आने की ख्वाहिश थीबड़े बोल थे उम्र थी कच्ची
[female vocals]सुनो…नई शादी है,ऑफिस के पहले दिन क्या पहनूँ?[male vocals]जान तुम तो सब में खिलती हो,जो जो पसंद हो पहन
[Verse 1]हाय कैसी मजबूरी मिली,बिन दाने की मूँफली बसछिलके ही हाथ में आयेऐसी टुच्ची किस्मत सच्चीलिखा कहाँ से लाए देख
[Verse 1]दोस्तों…आज मैं जिस मुकाम पर खड़ा हूंउसमें बहुत से लोग मेरे साथ थेमगर सभ्य कुमार का इसमें बहुत हाथ
[Verse 1]मैसूर की हंसी वादियों मेंघुली गुलकंद की फ़िज़ाचाहत में फिसल गया थाकिसी की मैं शादी शुदा बस की सवारी
[Verse 1] सुबह खाकर एक बर्गर कंधे पे लादे हुए बोझ चौक से चांदनी चौक तक बांटा करता हूँ रोज
[Verse 1]तेरी मोहब्बत के फूलरखे थे जो हमने किताबों मेंतेरे लिखे हुए खतबंद अलमारी में हर खत पे तेरा नामहर
[Verse 1] रेलगाड़ी की स्लीपर क्लास खिड़की की ठंडी हवा तेरे उड़ते हुए बाल थे और दिल मेरा फ़िदा न