मसाइल जो दरमियाँ हैं उन्हें सुलझा तो लें
यारों में नाम तेरा शामिल हो हमें गवारा नहीं
बड़ी मुश्किलों से संभाला है दिल का दामन
आस्तीन में सांप पालेंगे हम अब दोबारा नहीं
पीठ में घोंपा है खंज़र तूने हमारी बार बार
अब और नहीं चाहे रगड़ नाक हज़ार बार
अकेले चल दिए हैं हम अब बढ़ाएंगे कदम
जीतेंगे तनहा हम चाहे वीरां हो या बहार
वक्त की आँधियों में दिल के ज़ज़्बात बह गए
अब से बाकी सफर कटेगा नये लोगों के साथ
तेरे ज़ख्मों को खुला छोड़ दिया रिसने के लिए
अब दर्द ये जाएगा तो सांस आखिरी के साथ
दिल के इशारे पे नाचना कब का छोड़ दिया
ज़ज़्बात का समंदर आँखों में ही रोक लिया
तेरे बिना ही लिखी जायेगी अब हर तक़रीर
अंजाम की परवाह नहीं होगा देखा जाएगा
मसाइल जो दरमियाँ हैं उन्हें सुलझा तो लें
यारों में नाम तेरा शामिल हो हमें गवारा नहीं
बड़ी मुश्किलों से संभाला है दिल का दामन
आस्तीन में सांप पालेंगे हम अब दोबारा नहीं
