मेरे पड़पड़ दादाजी एक पहलवान थे
खुद मजबूत मजबूती के कद्रदान थे
दादा के पास खेत और खलिहान थे
गांव में रखते वो बढ़िया पहचान थे
शादी के लिए घर चमकाया गया
डिस्टेम्पर दीवारों पे करवाया गया
घर में आईं कई डिस्टेम्पर की बाल्टी
एक रख दादा ने बंटवा दीं सब बाल्टी
बाल्टी ऐसी दादा खरीदे पोता बरते
पड़पड़पड़ दादा पड़पड़दादा पड़दादा
दादा और पापा भी चले गए रही बाल्टी
पड़पड़पड़ दादा पड़पड़दादा पड़दादा
दादा, पापा इसके स्नान से मुक्ति पाए हैं
घिसी है पर चल रही है अब तक बाल्टी
दादा, पापा, पिता, सब बुज़ुर्ग अब यही है
अब तो डपट कहती है गलत क्या सही है
