नियति (Niyati)

पुत्र पिता का राजा बेटा बड़ा होकर राज करे
पिता पुत्र का शक्तिमान जो मिटा दे सब खतरे

जीवन की सच्चाई अलग सपनों का अलग जहाँ
वक्त के आगे सपने साबित होते नामंजूर ऐ खुदा

उम्र बीतती आस टूटती शक्तिमान ढल जाता है
दिन दिन बुढ़ापे के कारण ज़र ज़र होता जाता है

और पुत्र का राजयोग साधारण होता जाता है
दो पाटों में पिसकर कहीं गुमनामी में खो जाता है

जीवन चक्र के पिंजरे में स्वप्न हैं भ्रम नियति अलग
पिता पुत्र फिर पुत्र पिता बनता बिगड़ता रहता जग

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