हाथों की लकीरों में (HKLM)

[Verse 1]
हाथों की लकीरों में लिखा तुम्हारा ही नाम है
रास्ते अलग हो गए हैं, कैसा ये इम्तहान है
तुम्हें तस्वीर में देखते हैं जब तनहा होते हैं
हम अपने ही घर में जैसे अजनबी होते हैं

[Chorus]
बिखरा एक सपना है, टूटा है जो दिल
वक़्त थम गया है, दूर हो गयी मंज़िल
मोहब्बत के नग़मे तरन्नुम न बन सके
तुम रूठ गए हम मनाते ही रह गए

[Verse 2]
वो बातें, वो कस्में, अब बस यादें बन गयीं
मेरी सांसें तुम्हारे बिना जैसे बोझ हो गयीं
कौन कहता है इश्क़ की इंतेहा नहीं होती
हम रोज़ मरा करते हैं रात साथ नहीं देती

[Chorus]
बिखरा एक सपना है, टूटा है जो दिल
वक़्त थम गया है, दूर हो गयी मंज़िल
मोहब्बत के नग़मे तरन्नुम न बन सके
तुम रूठ गए हम मनाते ही रह गए

[Bridge]
अब खामोशी ही हमसफ़र है अपनी
तेरी यादों की भीड़ में तन्हाई सिमट गई

[Outro]
अधूरे से तुम…
अधूरे से हम…
अधूरा प्यार…
अधूरी कहानी…
सिर्फ यादें बाकी…
टूटा हुआ दिल…
जीना मुश्किल…

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