वह गिर गया था…
सड़क पर टकराने के बाद…
उसकी बाइक को…
मारा था…
सामने से बस ने…
आया…
उसे याद…
[Verse 1]
बहुत दर्द था…
शायद कई हड्डियाँ टूट गई थीं…
सर में चोट थीं…
सड़क भी ख़ून से भर गई थी…
साँझ ढले…
दिल्ली दफ़्तर से घर लौट रही थी…
हर शख़्स को…
अपने घर लौटने की जल्दी थी…
[Verse 2]
कुछ राहगीरों ने…
मदद का हाथ भी बढ़ाया था…
उसे…
और बाइक को…
सड़क किनारे लगाया था…
दर्द के साये में…
याद आता था उसे अपना घर…
ठीक होता…
तो पहुँच जाता…
अब तक तो उधर…
[Verse 3]
बेटी…
छोटे पाँवों से…
दौड़कर…
दरवाज़ा खोलती…
लिपट जाती…
गले से उसके…
और…
जेब टटोलती…
[Verse 4]
पत्नी के पास जाने से पहले…
माँ के पास जाता…
कुछ सुनता…
माँ की…
दिन भर की…
अपनी सुनाता…
बाबूजी…
रोज़ की तरह…
ज्ञान बघारते हुए मिलते…
जो वे…
अक्सर ही…
किया करते थे…
[Verse 5]
पत्नी को मिलता…
सरप्राइज़ में…
नई साड़ी देता…
“सेल में से ली है…”
कहकर…
उसे खुश कर देता…
वह हँसकर कहती…
“इसकी क्या ज़रूरत थी…”
“मेरे पास…
पहले कई…
रखी हैं…”
[Bridge]
यह सोचकर मगर…
उसकी अंतरात्मा…
रो पड़ी…
बदकिस्मती…
शायद…
ले आई थी…
अंतिम घड़ी…
[Outro]
डूबती साँसों के बीच…
उसने…
कुछ आवाज़ें सुनी…
(Background Voices)
“अरे भाई…”
“उठाओ…”
“अभी साँस चल रही है…”
(Long Pause)
आँखों के पर्दे पर…
मेरी बेटी…
इंतज़ार…
कर रही है…
