ये हमको पता है
जहाँ ने सबको ठगा है
जब जब दिल लगा है
धोखा ही सिर्फ मिला है
यह आज़माई बात है
नहीं लोगों से सुना है
तेरे ऐतबार पे एक बार
फिर ऐतबार जगा हैपता है कि ज़ख्म
ताज़ा लगेंगे गहरे
फितरत एक सी है
बदलते हैं बस चेहरे
हमें पता है सनम कि
अपनी राहें जुदा हैंफिर भी तेरी बातों पर
दिल को यकीन है आया
दिल पुरानी आदत को
फिर दोहराने लगा है
तेरे ऐतबार पे एक बार
फिर ऐतबार जगा हैरूठने और मनाने में
दिल टूटने के बहाने में
इश्क़ के दरिया में
डूबकर तर जाने में
रोने और रुलाने का
फिर से मन बना है
तेरे ऐतबार पे एक बार
फिर ऐतबार जगा हैसौंप दिया है हमने भी
लहरों को सफीना
अब तारें या डुबा दें
अपना हाफिज़ खुदा हैअब तारे या डुबा दे
अपना हाफिज़ खुदा है
