जानता हूँ.. (Jaanta Hun..)

जानता हूँ किसी रोज़ मोड़ मुड़ जाऊंगा
गोया जिस रोज़ भी तुम्हें छोड़ जाऊंगा
दिलों में उम्मीद एक लगन छोड़ जाऊंगा

ज़िन्दगी अपनी यारो एक खुली किताब है
तुमसे मिले प्यार का सब इसमें हिसाब है
प्यारे उन लम्हों की ख़ुशी छोड़ जाऊंगा
दिलों में उम्मीद एक लगन छोड़ जाऊंगा

ज़माने के रंग कई जनाब हमने देखे हैं
मिलन की ख़ुशी ग़म जुदाई के देखे हैं
ख़्वाबों से बुने जो महल छोड़ जाऊंगा
दिलों में उम्मीद एक लगन छोड़ जाऊंगा

तक़दीर से हौसले की जंग की ज़िद थी
लकीर हाथों की बदलने की ज़िद थी
शोले न जगे तो चिंगारी छोड़ जाऊंगा
दिलों में उम्मीद एक लगन छोड़ जाऊंगा

जानता हूँ किसी रोज़ मोड़ मुड़ जाऊंगा
गोया जिस रोज़ भी तुम्हें छोड़ जाऊंगा
दिलों में उम्मीद एक लगन छोड़ जाऊंगा

Scroll to Top