ABC – XYZ

A, B से जब कुछ कहता है,
B दोहराता है C से।
C, A जब बन जाता है,
तो फैले बात तेजी से।

बातों ही बातों में सारा शहर
बनता A और C।
क्योंकि भेड़चाल में आसानी से
मिल जाते हैं B।

रफ्ता-रफ्ता शहर का माहौल
उग्र हो उठता है।
हर शख़्स इंक़लाबी होकर
मशाल थाम लेता है।

फूँक देता है अपने देश की
संपत्ति, प्रगति को।
जला डालता बसें, आशियाने,
निज भविष्य को।

फिर भी जी न भरे तो फिर
धरने पर बैठता है।
पीछे चलती अंधी भीड़ का
रहनुमा बनता है।

दूर कहीं बैठे XYZ हंस कर
जश्न मनाते हैं।
जन को जन से लड़वाकर
प्रपंच सजाते हैं।

आम आदमी रोज़ लड़ता है—
रोज़गार, फाके से।
फिर भी बह जाता एक नारे,
एक बहकावे से।

लोकतंत्र में आम-ओ-ख़ास की
अभिव्यक्ति स्वतंत्र है।
स्व गुणगान, विरोधी को गाली—
क्या यही लोकतंत्र है?

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