आरज़ू कहाँ से लाऊँ(Aarzu Kahan Se Laaun)

दिल आशना मगर आरज़ू कहाँ से लाऊँ
ख्वाहिशें हैं मगर ज़ुस्तज़ु कहाँ से लाऊँ
लब सिल गए हैं खुशी कहीं खो गई है
ख़ुशी बिकती नहीं जो मैं खरीद लाऊँ

दिले बर्बाद को तुमसे कुछ नहीं चाहिए
कभी टूटे नहीं जो बस एक नींद चाहिए

गुस्ताख़ इन आँखों का मैं अब क्या करूँ
तुम्हें संवारती थी वो नज़र कहाँ से लाऊँ
रास्ते गुम हो गए हैं अभी मंज़िल दूर है
सफर पे चलने का हौसला कहाँ से लाऊँ

उन हंसी शामों की याद हंसाती नहीं हैं
तुम्हारी बातें दिल को बहलाती नहीं हैं
जिन लम्हों में तुम थी बस तुम ही तुम
कोई लौटा दे मैं वो पल कहाँ से लाऊँ

दिले बर्बाद को तुमसे कुछ नहीं चाहिए
कभी टूटे नहीं जो बस एक नींद चाहिए

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