इज़हारे दिल (Izhaare Dil)

याद है तुमको छत पे तुम्हारी
मैंने एक कागज़ फेंका था
तुम अपनी छत पर बैठी थी
मैं मुंडेर पर लेटा था

दोपहर का वक्त था शायद
घरवाले सब सो गए थे
डैड तुम्हारे बैग उठाकर
ऑफिस को चले गए थे

हम एक दूजे को देखने
अक्सर छत पर आ जाते थे
आँखों में दोनों इश्क़ का
इतिहास भूगोल पढ़ जाते थे

क्या कहें उम्र ही ऐसी थी
हर शय अच्छी लगती थी
पहले प्यार की जब क्लास
हम दोनों की ही लगती थी

वो फेंका हुआ कागज़ देख
तुम कितना घबरा गयी थी
झट उठाकर मेरे ख़त को
शरमाई नीचे आ गयी थी

ख़त जिसमें मैंने आखिर में
जो आई लव यू लिखा था
कागज़ का टुकड़ा नहीं
वो मेरा इज़हारे दिल था

याद है न छत पे तुम्हारी
मैंने एक कागज़ फेंका था
तुम जब छत पर बैठी थी
मैं मुंडेर पर लेटा हुआ था

दोपहर का वक्त था शायद
घरवाले सब सो गए थे
डैड तुम्हारे बैग उठाकर
ऑफिस को चले गए थे

हम एक दूजे को देखने
अक्सर छत पर आ जाते थे
आँखों में दोनों इश्क़ का
इतिहास भूगोल पढ़ जाते थे

क्या कहें उम्र ही ऐसी थी
हर शय अच्छी लगती थी
पहले प्यार की जब क्लास
हम दोनों की ही लगती थी

वो फेंका हुआ कागज़ देख
तुम कितना घबरा गयी थी
झट उठाकर मेरे ख़त को
शरमाई नीचे आ गयी थी

ख़त जिसमें मैंने आखिर में
जो आई लव यू लिखा था
कागज़ का टुकड़ा नहीं
वो मेरा इज़हारे दिल था

वक्त बीता दिल की बातें
किसी कोने में दफ़्न हुईं
ज़िन्दगी मुंडेर से हमको
आज सफर में ले गयी
तुम कुछ बदल गयी हो
मैं भी वो अब कहाँ हूँ
तुम चश्मे से देखती हो
मैं भी गंजा हो गया हूँ

एक मुकाम पर मिले थे
एक सफर में जुदा होंगे
चाहे जहाँ भी हम रहेंगे
खयालों में मिलते रहेंगे

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