इमोसनल कवि बेचारा (Emotional Kavi Bechaara)

नए शहर की एक गली
जहाँ न पहुँच सके रवि
सम्मलेन जाने से पहले
गुजरे वहां से कवि

बाल आ गए कान पर
गए नाई की दुकान पर
कटवाने को सर के बाल
और दाढ़ी बढ़ी

देख नाई ने किया इशारा
कवि सोचे है गूंगा बेचारा
पलकें भीगीं दिल भर आया
इमोसनल थे कवि

कहा प्रभु कैसी यह माया
क्यों बन्दे को किया बेचारा
सोच सोच कर अंतर्मन में
कविता नई जगी

भारी मन से सीट घेरकर
शीशे में नाई को निहारा
किया बालों की ओर इशारा
चला कैची कंघी

नाई यकायक बाहर भागा
कवि घबराकर पीछे भागा
आफत है या कोई भूचाल
समझ पड़ी नहीं

बाहर नाई ने जा थूका
गुटका थूक कवि को देखा
कर्कश आवाज़ में बोला
डेढ़ सौ रूपया लगेगा
सर पीटने लगे कवि

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