मिलते हो जब (Milte Ho Jab)

मिलते हो जब तुम मुस्कुरा देते हो
राम कसम मेरा दिन बना देते हो
अपने ज़ज़्बात मैं जो कहना चाहुं तुमसे
सुनते तो हो मगर हंसी में उड़ा देते हो
क्या दिल में है क्यों नहीं बता देते हो

तुम्हारी आँखें बताती हैं कि कुछ तो है
वर्ना क्यों हमें तुम हर राज बता देते हो
कभी रूठ जाते हो यूं ही बातों बातों में
हम रूठें अगर तो कसम खिला देते हो
तुम्हारी हर बात से हमें अच्छे लगते हो
तुम चाहते हो हमें क्यों नहीं बता देते हो

मिलते हो जब तुम मुस्कुरा देते हो
राम कसम मेरा दिन बना देते हो
अपने ज़ज़्बात मैं जो कहना चाहुं तुमसे
सुनते तो हो मगर हंसी में उड़ा देते हो
क्या ख्याल है क्यों नहीं बता देते हो

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