जंग (Zung)

गांव में मचा कोलाहल अखबारों में बनी सुर्खियां
टीवी पर हुए चर्चे तमाम और बांटी गयीं बर्फियाँ

फौजी का जंग में साहस भाई क़ाबिले तारीफ़ था
एक हाथ दो पैर गए बच गया मगर नसीब था

मैं मिला था उस वीर से जोधपुर हस्पताल में
व्हीलचेयर में सिमटा आधा सा अजीब हाल में

कारगिल में लड़ा था जंग हुई भारी थी
पत्नी और एक बेटी की जिम्मेदारी थी

देश खड़ा साथ था मुआवज़े की बारी थी
निकले बारात फौजी की गांव में तैयारी थी

दबे स्वर मगर ये भी थे :

लाचार फौजी कहाँ जायेगा बाज़ारों में
भाई के पैसे पर बंदरबांट चलेगा परिवारों में

जब तक जेब भारी है रिश्तेदार आते रहेंगे
खून पसीने की कमाई को यूँ ही उड़ाते रहेंगे

फौजी का काम तो है लड़ना लड़ता ही रहेगा
पहले लड़ा दुश्मन से अब अनहोनी से लड़ेगा

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