मिटटी यहाँ की गीली है
यह ज़मीं खोखली सीली है
इस पर क्या मकां बनाओगे
इस दलदल को पाट सके
वो डांवर कहाँ से लाओगे
यह मन का अँधेरा कोना है
जिसका न सवेरा होना है
सन्नाटे का शोर है बस
भूतों का यह एक डेरा है
तुम कहो तो भूत भगाने को
कौन सा जतन कराओगे
इस पर क्या मकां बनाओगे
मिटटी यहाँ की गीली है
यह ज़मीं खोखली सीली है
इस पर क्या मकां बनाओगे
इस दलदल को पाट सके
वो डांवर कहाँ से लाओगे
इस पर क्या मकां बनाओगे
एक समय इस जगह में जब
एक सभ्यता बसती थी
हंसी और किलकारिओं की
ज़िंदादिल एक बस्ती थी
घर के बड़े से आंगन में
माई बाप और संतानें
हरा नीम का बड़ा पेड़
सब खुश थे थीं सुख की बातें
अब यादों हैं दफन सिर्फ
खंडहर के कोने कोने में
और सभ्यता खो गयी है
कालांतर के किसी पन्ने में
बिना तेल दिये को तुम
कब तक रौशन रख पाओगे
इस पर क्या मकां बनाओगे
मिटटी यहाँ की गीली है
यह ज़मीं खोखली सीली है
इस पर क्या मकां बनाओगे
जो इस दलदल को पाट सके
वो डांवर कहाँ से लाओगे
इस पर क्या मकां बनाओगे
