दोस्ती (Dosti)

वक्त है बदल रहा और रास्ते अनजान
पुकारता हूँ तुम्हें कि बानगी मिलती रहे
मंज़िलों की राह पर कारवाँ बढ़ते चलें
दीप मैं जला रहा हूँ रौशनी मिलती रहे

नए कीर्तिमान हैं देखो तुमको खोजते
लाखों स्वप्न पूर्णता अपनी तुममें संजोते
खुद चलना है तुम्हें नयी राह दिखानी
जगा रहा हूँ तुम्हें कि प्रेरणा मिलती रहे

वक्त है बदल रहा और रास्ते अनजान
पुकारता हूँ तुम्हें कि बानगी मिलती रहे

जीवन की मुश्किलों के हल आसां नहीं
राह भटका दें ऐसे दुश्मन कम तो नहीं
प्रतिद्वंदियों से आगे बढ़ चलना है तुुम्हेँ
प्रोत्साहन हूँ दे रहा ऊर्जा मिलती रहे

वक्त है बदल रहा और रास्ते अनजान
पुकारता हूँ तुम्हें कि बानगी मिलती रहे

माना कि मेरे लहजे में हल्का सा तंज़ है
उपहास भी मेरे यार दोस्ती का रंग है
बीच राह ठोकरों से लड़खड़ाओ कहीं
हाथ हूँ बढ़ा रहा कि ‘मशाल जलती रहे

दोस्ती को मेरी तुम चाहे जो भी नाम दो
अच्छा लगे या फिर चाहो बुरा मान लो
ध्येय मेरा बस है कि सर तुम्हारे ताज हो
आसमान छुओ तुम मंज़िलें मिलती रहें

वक्त है बदल रहा और रास्ते अनजान
पुकारता हूँ तुम्हें कि बानगी मिलती रहे
मंज़िलों की राह पर कारवाँ बढ़ते चलें
दीप मैं जला रहा हूँ रौशनी मिलती रहे

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