ऋतु बसंत (Ritu Bansant)

नए फूलों को सौंप चमन की ज़िम्मेवारी
माली करो नयी बसंत ऋतु की तैयारी

कलियाँ हैं कोमल इनको खिलने दो
बढ़ना सबका हक़ इन्हे भी बढ़ने दो
स्वच्छंद हवा से मिलकर सुगन्धित होंगी
शोभा चमन की रखें ये अनुबंधित होंगी
पूर्ण नहीं सम्पूर्ण होंगी आशाएं तुम्हारी
माली करो नयी बसंत ऋतु की तैयारी

काँटों से वैर न रख उनका महत्त्व है
हितैषी पितृ समान माँ सा मातृत्व है
अनुशासन सौंदर्य का अभिन्न अंग है
तभी तो फूलों के उपवन में कई रंग हैं
कांटो पर छोड़ कलियों की पहरेदारी
माली करो नयी बसंत ऋतु की तैयारी

देखना माली बसंत उपवन से न रूठे
फूल व् काँटों के रिश्ते की डोर न टूटे
कोई कीट या खरपतवार न लगने पाए
आभा उपवन की में न कोई दाग लगाए
बूटे हों स्वस्थ तो खिल उठेगी हर क्यारी
माली करो नयी बसंत ऋतु की तैयारी

नए फूलों को सौंप चमन की ज़िम्मेवारी
माली करो नयी बसंत ऋतु की तैयारी

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