बागे बहार (Baagh-e-Bahaar)

मेरी राह में जिस जिसने कांटे बिछाए थे
वो पलकों से चुन चुनकर सब हटाए हैं
ऊपरवाले का करम है मुझे क्या परवाह
सरे राह फूल ही फूल उसने बिछाए हैं

तेरे दर पर मुझे जन्नत मिल गई
इशारों को समझना तेरा काम है
मेरी नजरों में दुनिया की कोई कीमत नहीं
तेरी खुदाई में ही अब आराम है

साया बनकर अब कोई हाफ़िज़ रहे
मैं नहीं अकेला हर पल एहसास रहे
मुझसे कहता है वो की तू बढ़ता चल
मेरे नींदों में जन्नत के वो ख्वाब रखे

तेरे दर पर मुझे जन्नत मिल गई
इशारों को समझना तेरा काम है
मेरी नजरों में दुनिया की कोई कीमत नहीं
तेरी खुदाई में ही अब आराम है

मैं भागा हूँ बहुत होकर तुझसे जुदा
तेरे दर से में अब और न कहीं जाऊँगा
अपने साये में रख मुझको परवरदिगार
मैं तुझमें ही एक दिन गुम हो जाऊँगा

तेरे दर पर मुझे जन्नत मिल गई
इशारों को समझना तेरा काम है
मेरी नजरों में दुनिया की कोई कीमत नहीं
तेरी खुदाई में ही अब आराम है

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