कड़वी बात महाभारत जी (Kadvi Baat Mahabharat Ji)

[Verse 1]
तीखी बात का तीर चला
दृष्टिकोण को बेध गया
विचारों के समंदर में
झंझावात सा उठ गया

हलचल तल तक पहुंची
क्रोध विकार घुलने लगा
रक्त प्रदूषित हुआ
खून का दौरा तीव्र हुआ

[Verse 2]
सांस उखड़ने लगी
जोर से दिल धड़कने लगा
सद्विचार मलिन हुए
मस्तिष्क बागी हो गया

कड़वी बात से बाँध सब्र
का तिनके सा बह गया
सामने वाला भी चकित
जिह्वा से क्या निकल गया

[Pre-Chorus]
आँखें लाल हुई, नथुने फूले
त्यौरी अम्बर छूने लगी
हाथ पैर असमंजस में
करे क्या और क्या नहीं

[Break]
बिजली कोंधी अकस्मात्
मस्तिष्क से ऑर्डर हुआ

[Chorus]
हाथ पैरों ने दे चटाक
लात और झापड़ जड़ दिया
गुत्थम गुत्था मारम पिट्टी
तन भूमि पर गिर पड़ा

[Verse 3]
लज्जित फिरता है तन अब
आँख मिला नहीं पाता है
फेर मुँह निकल जाता है
सामना जब हो जाता है

[Outro]
शब्द तीर हैं बड़े घातक
इनमें रखिए महारथ जी
बात बने रामायण है
बिगड़ी बात महाभारत जी

[Final Chorus]
शब्द तीर हैं बड़े घातक
इनमें रखिए महारथ जी
बात बने रामायण है
बिगड़ी बात महाभारत जी

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