बीच-बचाव (Beech-Bachaav)

दांये पैर और बांये पैर में हुई जो लड़ाई
तो दांये हाथ और बांये हाथ में भी ठन आयी

गर्दन घूमीं सर चकराया कड़क आवाज़ आयी
कान खुद ही बजने लगे आँखों की गयी बिनाई

हम गुलाम नहीं किसी के हाथ पैर कहने लगे
सभी मज़े करते हैं हम ही क्यों बोझा ढोने लगें

हमारी ताकत से ही सब सिस्टम चलता है
सारा दिन मर खप के भी हमको क्या मिलता है

आँख कान बोले हमको क्या अकड़ दिखाता है
मुंह को बोल सारा दिन बस बैठे बैठे खाता है

मसला हुआ पेचीदा देख सभी अंग झुंझलाने लगे
अपनी अपनी ढपली सब अपनी धुन में बजाने लगे

जब लम्बी चली लड़ाई शरीर की शामत आयी
सभी अंग बने मुखिया कोण फैसला करे भाई

हमारी ताकत सभी अंग घर की हैं सब घरवाले
आपस में लड़ने लगे तो बीच बचाव में कौन आवे

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