ज़ज़्बात की मेरे अजी बोली न लगाओ
बाजार में हर चीज़ बिकाऊ नहीं होती
छोड़ दो आदत कि हर शै की है कीमत
बाज़ारू फसानों में नसीहत नहीं होती
में लिख रहा हूँ जो दिल की है आवाज़
हैं दिल के ये ज़ज़्बात कोई सेल नहीं है
लफ़्ज़ों में ताक़त छुपी दुनिया जहां की
शायरी एक हुनर है कोई खेल नहीं है
अशआर मैं दिल के बेचूंगा किसी रोज़
बिक रहेगी जिस रोज़ ममता दूकान में
फूलों की महक जब हवा मोल बिकेगी
इंसानियत पर दांव लगेगा बाज़ार में
मेरी कलम से फुट बहे हैं दिल के नाले
बेकार नहीं जाएगा इन झरनों का बहना
दे कर ज़माने को नया ये रंग नयी सोच
गुलशन नया खिलाएंगे तुम देखते रहना
ज़ज़्बात की मेरे अजी बोली न लगाओ
बाजार में हर चीज़ बिकाऊ नहीं होती
छोड़ दो आदत कि हर शै की है कीमत
बाज़ारू फसानों में नसीहत नहीं होती
