मंगल विदाई गीत (Mangal Vidaaee Geet)

लाज तुम घर की सबकी लाड़ली
बेटी तुम आज ससुराल चली अरी बिटिया
तज घर आंगन बंधन पहने हाथों में कंगन हो चली

ममता की छाया में तुम थी पली
मैया के सुख दुःख की तुम थी सखी अरी बिटिया
मैया का सूना आँचल आँखन में दे गंगाजल हो चली

बाबा की आँखन की तुम रौशनी
पगड़ी बाबा की तुम तें है सजी आरी बिटिया
बाबा ने करा है कन्या दान शहर अनजान चली

भैया की राखी तुम बांधती
दौज भैया की तुम मंसती अरी बहना
लिपट भैया से जाना है संग सैंया के देखो रो चली

चंदा तारे देवें आशीष हैं
बाराती गेट मंगल गीत हैं अरी लाडो
जुग जुग सुहागन रहे किरपा बने जगदीश की

सासु मैया ससुर बाबा से हैं
देवर भैया नन्द बहना समझ अरी बिटिया
दुल्हन बनी हो बड़भाग रखियो दो घर की लाज जी

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