कल से ज़मीन तेरे नाम लिख जाएगी,
कागज़ से ज्यादा ज़ेहन पे छप जाएगी
कल से ज़मींदार तू मालिक कहलाएगा
दौलतमंदों की ज़मात में पूछा जाएगा
वो ज़मीन जो कभी किसी की नहीं हुई,
जाने कितनी पुश्तों पीढ़ियों को खा गई,
कल नाम अपने उसे दर्ज करा आएगा
दौलतमंदों की ज़मात में पूछा जाएगा
मशक्कत किसी की मौज तेरी हो गई
मेहनत का यहाँ मिलता कोई मोल नहीं
पौधा बोया था माली ने कि फल मिलेंगे
नसीब वाले ही मगर फल चख सकेंगे
माली कहाँ पेड़ अपने साथ ले जाएगा
अपनी पीढ़ियों के वास्ते छोड़ जाएगा
पीढ़ियों को ये ज़मीन निगल जाएगी
इस तरह से होनी खेलती चली जाएगी
मालिक कौन है! बात दबी रह जायेगी
