एक वक्त था जब गुलाम खरीदे जाते थे
इंसां इंसां के द्वारा गुलाम बनाए जाते थे
फिर गुलाम बाजार में बिकवाए जाते थे
इंसान बाजार से गुलाम खरीदने जाते थे
गुलाम, गुलाम, इंसान, इंसान कहलाते थे
और कोई भला इंसान मिल जाए
तो गुलाम फिर से इंसान बना दिए जाते थे
सुनो सुनो सुनो
इतिहास ने नया सूट पहन लिया है
नाम बदला है
फितरत वही पुरानी है
इंसान इंसान है
गुलाम नहीं है
(गुलाम नहीं है)
लोकतंत्र है आखिर
राज निरंकुश नहीं है
(नहीं है)
इंसान इंसान है
नाम बदल देने से क्या
(क्या)
गुलाम आज भी पाए जाते हैं
मनचाही शर्तों की नौकरी में फंसाए जाते हैं
जिनके चंगुल में कर्मचारी छटपटाए जाते हैं
हँसकर कहते हैं
ये तो आज़ादी का सौदा है
और पसीने की हर बूँद पर
मालिकों का दावा है
जीपीएस ट्रैकिंग
बायोमैट्रिक्स
कहाँ बचोगे
यह कैसा राग है
जो कहे बेड़ियों को विकास
अब कागज़ों पर सिर्फ स्याही है
झूठे सच पर लगी मुहर है
ऊपर से लोकतंत्र चमकता है
गहराई में बहता ज़हर है
इंसान इंसान है
गुलाम नहीं है
(गुलाम नहीं है)
लोकतंत्र है आखिर
राज निरंकुश नहीं है
(नहीं है)
इंसान इंसान है
नाम बदल देने से क्या
(क्या)
गुलाम आज भी पाए जाते हैं
डेमोक्रेसी
बस एक तमगा है
जेब में रखो
सवाल उठें तो दबा दो
माथे पर चस्पा दो
काम खत्म समझो
पर साँसों में जो जले आग
उसका क्या करोगे
पुराने सितम
या नए नियम?
इंसान इंसान है
गुलाम नहीं है
(गुलाम नहीं है)
लोकतंत्र है आखिर
राज निरंकुश नहीं है
(नहीं है)
इंसान इंसान है
नाम बदल देने से क्या
(क्या)
गुलाम आज भी पाए जाते हैं
(पाए जाते हैं)
जीपीएस का पहरा है
बायोमैट्रिक्स का पिंजरा है
इंसान इंसान है
तो ये किसका हथकंडा है
