वक़्त आ गया है (Waqt Aa gaya Hai)

वक़्त आ गया है कि शेर राजा तो रहेगा
जंगल में मगर उससे अब कोई न डरेगा
वो डर जिससे कभी कांप उठता जंगल
यह जंगल ही उसे एक रोज़ निगल लेगा
अपने ही डर से शेर अब छुपता फिरेगा

वो शानो शौकत और वो उसकी दहाड़
दहल जाते थे दिल और गूंजते थे पहाड़
उसे देख कर जो दौड़ते थे जान बचाते
छिप कर उसकी लाचारी पर वो हँसते हैं
उपेक्षा के तीखे तीरों को शेर कैसे सहेगा
अपने ही डर से वो अब छुपता फिरेगा

अकेलापन उसका कभी शान होता था
खौफ उसकी हस्ती का प्रमाण होता था
वो डर जिसे बल पर वह राजा होता था
जंगल उसकी शान में कसीदे पढता था
ज़िल्लत से मरेगा पर वो उफ़ न करेगा
शेर अपने डर से अब छुपता फिरेगा

शेर चाहता तो है अब नए दोस्त बनाना
बदल गया है वक़्त मगर है नया ज़माना
नए बादशाह ने उसे घायल कर दिया है
एक ही रास्ता है कि तड़प कर मर जाना
मर जाएगा भूखा मगर घास नहीं चरेगा
शेर अपने डर से अब छुपता फिरेगा

इज़्ज़तें शहरतें दुनिया में कायम न रहतीं
कल ताज किसी का था अब कोई और है
जो बीत गया अलग था नया आज दौर है
कभी थे महल आज ठिकाना कोई और है
शेर देगा सीख सब को मगर कौन सुनेगा
अपने ही डर से शेर अब छुपता फिरेगा

वक़्त आ गया है कि शेर राजा तो रहेगा
जंगल में मगर उससे अब कोई न डरेगा
वो डर जिससे कभी कांप उठता जंगल
यह जंगल ही उसे एक रोज़ निगल लेगा
अपने ही डर से शेर अब छुपता फिरेगा

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