वो कौन है (Woh Kon Hai)

वो कौन है

दिल में प्यार की घंटी बजा देती है
दिमाग में रंगीन बत्ती जला देती है

उलटकर पलटकर धोकर सुखाकर
आपको वो आप ही से चुरा लेती है

थ्री पीस पहनने वाले इंसान को
हाफ-पैंट टी-शर्ट में ला देती है

डंका बजता है उसी के नाम का
बहती हवा उसी का नाम लेती है

अनजान आ जाती है आपके घर
आप ही की पहचान भुला देती है

आप जो हैं
आप जो होते थे कभी रॉबिनहुड
शहंशाहे कुंवारागढ़ खुद- ब-खुद

आज होंगे कोई बड़े अफसर
बिजनेसमैन या सरकारी नौकर

भँवरे थे फूल-फूल मंडराते थे
माय लाइफ माय रूल्स चलाते थे

हर दिन मौज यारों के संग मस्ती
अपन को चाहिए मंहगी या सस्ती

वो कौन है
कान में ऐसा कुछ कह जाती है
हर तरफ सिर्फ वो नज़र आती है

माँ बाप भाई बहन जानते होंगे
अलग अक्स उनका वो दिखाती है

हर मर्ज़ की वो दवा कर देती है
हस्ती को वो तो धूल चटा देती है

कीटनाशक दवा की तरह आपके
दोस्त जैसे हों कोकरेच भगा देती है

आप जो हैं
अपनी पहचान यूँ गंवाए जाते हैं
खुद से ही अनजान पाए जाते हैं
बैंक बैलेंस पर सांप थे उसको
शॉपिंग मॉल में उड़वाये जाते हैं

वो कौन है
आपकी पेंशन ग्रेचुटी पी-ऍफ़
घर सब नाम अपने करा लेती है
आपकी सैलरी से ही वो आपको
खर्चे के लिए पॉकेट मनी देती है

वो जो हर राज़फाश कर लेती है
आप नहीं जानते वो जान लेती है

इश्क़ की हर डायरी जला देती है
रुक्मिणी हर राधा की सजा देती है

दिन में चाँद-तारे रात में सूरज
वो आपको दिखाए चली जाती है

हर तीर को तरकश में सजाती है
सही वक्त पड़ने पर चलाती है

आप जो हैं
आप सफाई देते हुए रह जाते हैं
बेगुनाही की दलीलें देते जाते हैं

योर ऑनर अदालत में जनाब
मुज़रिम ही करार दिए जाते हैं

वो कोन है
ज़रा सुनना! कहकर वो आपको
रामू काका सरीखा बना देती है

कील लगाओ हथोड़ी थमा देती है
राशन ले आओ थैला थमा देती है

टेंशन देने को बिल थमा देती है
जुड़वा लाओ सैंडल थमा देती है

गाय की रोटी और यहाँ तक कि
कचरा भी आपसे फिकवा देती है

खुद जैसे महारानी बच्चे युवराज
वो आपको गुलाम बना देती है

वो कोन है
वो आपको हर मान सम्मान देती है
हर दर्द में वो साथ खड़ी मिलती है

पेट से दिल तक के रास्ते के लिए
घंटों गैस चूल्हे पर चढ़ी मिलती है

कमाती नहीं है वो मगर जादू से
बुरे वक्त में गुल्लक फोड़ देती है

धीमी-आंच पर रखी की खीर जैसे
धीरे धीरे लज़ीज़ लगने लगती है

आपकी न हो जाए सांस आखिरी
वो है सांस आपके लिए लेती है


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