शादी का लड्डू (Shaadi Ka Laddoo)

शादी का लड्डू  है यारो कुछ मीठा कुछ खारा 
खाकर इसको  बन जाते इंसान सभी आवारा 
शादी कर पछताय जग बिन शादी भी हाय हाय
तो क्यों न लड्डू शादी का गप्प से खा लिया जाय  

कहीं ऐसा होता है किसी से ताल मिला करती है 
शादी की हंडिया में इश्क़ की दाल गला करती है
शादी में फिर दाल का तड़का क्यों न लगाया जाय 
संग प्रियतम के ढोल इश्क़ का जम के बजाया जाय 

शादी कर पछताय जग बिन शादी भी हाय हाय
तो क्यों न लड्डू शादी का गप्प से खा लिया जाय

एक अपने थे पाण्डे जी सट्ट कुंवारे साण्डे जी
सारी उम्र बेचारे किचन में रहे मांजते भाण्डे जी
वक़्त आखिरी में था न कोई अपना दाग़ लगाय
चिड़िया चुग गयी खेत तो भैया कौन करे उपाय
शादी कर पछताय जग बिन शादी भी हाय हाय

तो क्यों न लड्डू शादी का गप्प से खा लिया जाय
कम्मो अपने यौवन में किसी हिरणी सी भगती थी
गली मोहल्ले के लड़कों में हड़कंप कर देती थी
कितनो आशिक छोड़े जाने कितने दिए भगाय
उम्र हो गयी अब शादी के लिए बैठी है बीपी बढ़ाय

शादी कर पछताय जग बिन शादी भी हाय हाय
तो क्यों न लड्डू शादी का गप्प से खा लिया जाय

इश्क़ भले हो आग का दरिया पार डूब कर जाना
खड़े किनारे पर मछली मत गिनते ही रह जाना
काँटा फेंको दरिया में एक अदद मछली फंस जाय
लड्डू खईले ले शादी का जो मोतीचूर हुई जाय  

शादी कर पछताय जग बिन शादी भी हाय हाय
तो क्यों न लड्डू शादी का गप्प से खा लिया जाय
शादी का लड्डू  है यारो कुछ मीठा कुछ खारा 
खाकर इसको  बन जाते इंसान सभी आवारा 

शादी कर पछताय जग बिन शादी भी हाय हाय
तो क्यों न लड्डू शादी का गप्प से खा लिया जाय

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