कविता लिख कवि मरा फैन मिला न कोय
बस्ती है गंजेन की कवि कंघी करे न कोय
पोथी पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय
टीवी शो में नाच ले ओ बल्ले बल्ले होय
सूट गए साड़ी तजी चुटिया दई कटाय
कानहींपुर की बहनजी मैडम कहलाय
सिस्टम को माने नहीं चैनल पर गुर्राय
गाँधी को गाली बके झट नेता बन जाय
प्रेमी सुसाइड करे घर घर शोक मनाय
किसान मरा कर्ज में कोई न देखन जाय
जवान बॉर्डर पर मरे तो शहीद कहलाय
जीवित घर लौटता सब को बोझ सुझाय
पुत्तर जी सर्विस करें बहू काम पे जाय
सास ससुर घर बेचैन रोटी कौन पकाय
