हे सूर्य (Hey Soorya)

अथाह ब्रह्माण्ड में तुम
अकेले दमकते हो
ऊजिय़ारा फैलाकर
अंधेरे समेटते हो

काले अंधेरे को नीलगगन दिखाते हो
क्या दिखाना चाहते हो
वैसे भी गगन के पार तो अंधेरा है
तम ने मेरे मन को भी
भीतर से घेरा है

मैं अपना सूरज कहां से लाऊं
मन कोने में उजियारे लाऊँ
अंधकार मिटाऊं
अंधेरे से फिर उजाले की ओर जाऊं

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