कल फादर्स डे है मेरी बेटी ने याद दिलाया
जब उसने बाजार से मेरे लिए गिफ्ट मंगायाबेटियां ऐसी होती हैं हम सोचते रह जाते हैं
वे सहज़ता से कहती हैँ हम लफ्ज़ चबाते हैंमुझे भी तब याद आया की मेरे भी फादर थे
कभी समझ नहीं सके क्यों उनसे डरते थे
दिल ही दिल में सही पर उन्हें प्यार करते थेउन्होने कभी जताया नहीं मैं लांघ पाया नहीं
डर की लक्ष्मण रेखा बीच हमेशा खिची रही
आज दुनिया में नहीं, दिल में हैं, रूबरू नहींकाश अभिमन्यु बनकर चक्रव्यूह तोड़ देता
सीने से लग “आई लव यू”, बोल दिया होता
