शीशा ए दिल (Sheesha E Dil)

खाया है धोखा टूटा है दिल बार बार
जब जब किया है किसी पे हमने ऐतबार
नादाँ थे हम आया था किसी पर जो प्यार
सरे महफ़िल तमाशा हम बन गए सरकार

खाया है धोखा टूटा है दिल बार बार
जब जब किया है किसी पे हमने ऐतबार

साँसों से हमको छला नज़रों ने हमको ठगा
ख़्वाबों ने दगा किया उल्फत ने जला दिया
शीशे के दिल को पत्थर से तोड़ा है यार
जब जब किया है किसी पे हमने ऐतबार

खाया है धोखा टूटा है दिल बार बार
जब जब किया है किसी पे हमने ऐतबार

दिल को बहलाते रहे संभल जा समझाते रहे
रोका बहुत मन किया आखिर फिसल ही गया
पगला हुआ दिल रोता है अब जार जार
आखिर किया क्यों किसी पर हमने ऐतबार

खाया है धोखा टूटा है दिल बार बार
जब जब किया है किसी पे हमने ऐतबार

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