न बोले तुम न मैंने कुछ कहा (NBTNMKK)

न बोले तुम न मैंने कुछ कहा
आँखों ने आँखों से जाने क्या कह दिया
तुम खुले मैं भी खिलने लगा
दिल ही दिल में दिल दिल से जुड़ गया

न बोले तुम न मैंने कुछ कहा
दिल दिल की बात मगर समझने लगा
तुम बने खास फिर अपने हुए
बढ़ने लगा चाहतों का हंसीं सिलसिला

न बोले तुम न मैंने कुछ कहा
दिल बस तुम्हारी ही बातें करने लगा
पुकारा करता था तुम्हें दिल बार बार
लबों से पर तुमको न कुछ कह सका

न बोले तुम न मैंने कुछ कहा
तुम चले गए दर्द हमदम बन गया
सजाया दरीचा ऐ दिल में इसे
ज़ख्म तेरी यादों का सबब बन गया

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