उसकी एक पत्नी थी,
अब नहीं है
पत्नी उसका ख्याल रखती थी
क्योंकि वह उसकी पत्नी थीवह उसका बेटा है
वह उसके बेटे की पत्नी है
उसके बेटे का ख्याल,
उसकी पत्नी रखा करती थी,
क्योंकि वह उसकी माँ थीउसके बेटे का ख्याल,
उसकी पत्नी भी रखती है
क्योंकि वह उसकी पत्नी हैबेटे का उस पर हक़ है
क्योंकि वह उसका बेटा है
बहू का भी उस पर हक़ है
क्योंकि वह बेटे की पत्नी हैवह उसका ख्याल रखता है
क्योंकि वह उसका बेटा है
वह उसका भी ख्याल रखता है
क्योंकि वह उसकी बहू हैघर की नेमप्लेट पर
उसका नाम हैवो कप रख देता है,
दरवाज़ा खोल देता हैबच्चे जो ऑनलाइन आर्डर करते हैं
वो पार्सल डिलीवरी ले लेता हैहर रोज़ सैर को जाता है
आते हुए दूध सब्ज़ी ले आता है
बच्चों को स्कूल छोड़ता
दोपहर को ले भी आता हैवह सबका है
मगर कौन उसका है
वह अंतर्मन में अकेला है
उसका ताल्लुक है सबसे
मगर दर्द वो बांटे किससे
वह है अकेला
भीड़ है आसपास
फिर भी हैउसकी आवाज़ में थकन है
पर शिकायत नहीं
उसकी आँखों में खालीपन है
पर हिकारत नहीं
वह घर के बीचोंबीच खड़ा
एक पिलर की तरह
खुद के भीतर दूर चला जाता है
वह सबको थामे हुए है
मगर खुद को नहींवह सबका है
मगर कोई नहीं उसका है
वह सबका है
मगर कोई नहीं उसका है
वह अंतर्मन में अकेला है
वह है अकेला
भीड़ है आसपास
फिर भी है, अकेलावो सुलग रहा है
गल रहा है
आहिस्ता आहिस्ता
रोज़ पिघल रहा है
मैल मैल निखरता
खरे सोने में रोज़
तब्दील हो रहा है
