पानी (Paani)

रंग जिस में चाहोगे रंग जाऊँगा
जिस ढंग सोचोगे ढल जाऊँगा
आड़े आओगे तो मुड़ जाऊँगा
बाँधोगे मुझे तो सड़ जाऊँगा
पानी हूँ रुकता नहीं रोकने से
जो ठहरा समंदर हो जाऊँगा

धीरे से जड़ों में समा जाऊँगा
ज़मींदोस्त गायब हो जाऊँगा
एक रोज़ तुम्हारे वज़ूद को मैं
तिनके के जैसे निगल जाऊँगा
पानी हूँ ताक़त का दावा नहीं
जो ठहरा समंदर हो जाऊँगा

ग़म अपना दे दो तुम मुझे
आज़मा कर देखो अभी मुझे
दर्द ए दिल पीने की खातिर
अश्क बनकर छलक जाऊँगा
पानी हूँ मैं तुम में समाया हूँ
जिस रंग मैं चाहोगे रंग जाऊँगा

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