तुम्हारे बारे में (Tumhaare Bare Men)

बहुत सुना था तुम्हारे बारे में
मिले जो तुम और बुरा लगा
लोग कम कहते हैं तुम्हारे बारे में
सोचता हूँ मैं क्यों तुमसे मिला

सवाल करता हूँ खुद से मैं रोज
जब भी तुम्हारा ख्याल आता है
आखिरी शख्स भी रहो दुनिया में
मुलाकात पर मलाल आता है

दिल का क्या है हम समझा लेंगे
तुम जैसे फिरते हैं रोज़ कई
अंधी गलियों से दिल जब निकलेगा
राहें मिल ही जाएंगी नयी

तुम्हारे चेहरे से अब नफरत है
तुम्हारी हंसी हमें जलाती है
ऐसा जहाँ में हमको जाना है
तुम्हारी याद जहाँ नहीं आती है

किसी और की नहीं मानते हम
आँखों देखी तेरी बेवफाई है
तौबा करते हैं ग़लती हमारी थी
इसी गुनाह की सजा पायी है

दिल का क्या है हम समझा लेंगे
तुम जैसे फिरते हैं रोज़ कई
अंधी गलियों से दिल जब निकलेगा
राहें मिल ही जाएंगी नयी

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *