उसने खुद ही यूँ रिश्तों को तार तार कर लिया
गैरों को अपना समझा अपनों को रुसवा कियादिल के दरवाज़े पर उसने लगा लिया ताला
झूठ को सच समझा और सच को भूला दियाइस जहां ने कब किया है किसी को माफ़
अच्छे अच्छों को मिटटी में दफ़न कर दियाएक बार जो उतरा बेईमानी की राह पर
पीछे मुड़कर न देखा क्या पीछे छूट गयासपनों की तिज़ारत वो यूँ ही करता रहा
वादे किसी से किये थे वो सब भूल गयाइस जहां ने कब किया है किसी को माफ़
अच्छे अच्छों को मिटटी में दफ़न कर दिया