बॉस का चमचा (Boss Ka Chamcha)

पोंछता हूँ धो देता हूँ बात बात पे रो देता हूँ
इसकी उसकी चुगली मैं गोभी खोद देता हूँ
मैं धोऊँ रोज़ गमछा वो बॉस और मैं चमचा

उसको हमेशा घेर के रखूं बुद्धि फेर के रखूं
परिंदा पर मारे पंख साले के नोच के रख दूँ
दे डालूं पानी खर्चा मैं ठहरा बॉस का चमचा

पोंछता हूँ धो देता हूँ बात बात पे रो देता हूँ
इसकी उसकी चुगली मैं गोभी खोद देता हूँ
मैं धोऊँ रोज़ गमछा वो बॉस और मैं चमचा

दिन को वो रात कहे बत्ती बुझा रात कर दूँ
रविवार को बुध बताये ऑफिस खुलवा दूँ
सेवक हूँ मैं सच्चा मैं ही हूँ बॉस का चमचा

पोंछता हूँ धो देता हूँ बात बात पे रो देता हूँ
इसकी उसकी चुगली मैं गोभी खोद देता हूँ
मैं धोऊँ रोज़ गमछा वो बॉस और मैं चमचा

सर दर्द में बाम बनूँ दरी बनूँ जो आये उबासी
खुजली में मल्हम बन जाऊं हो चूक न जरा सी
समझ न मुझ को कच्चा मैं हूं बॉस का चमचा

पोंछता हूँ धो देता हूँ बात बात पे रो देता हूँ
इसकी उसकी चुगली मैं गोभी खोद देता हूँ
मैं धोऊँ रोज़ गमछा वो बॉस और मैं चमचा

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