इंसान मैं आम था मुझको वो नवाब बनाकर ले गयी
लखनऊ शताब्दी मुझे ख़ास मेहमान बनाकर ले गयी
सोते सुलाते बतियाते वो खाते खिलाते मुझे ले गई
इंसान मैं आम था मुझको वो नवाब बनाकर ले गयी
लखनऊ शताब्दी मुझे अपना मेहमान बनाकर ले गयी
ससुराल मुझे जाना था वो साली की तरह ले गयी
इंसान मैं आम था मुझको वो नवाब बनाकर ले गयी
लखनऊ शताब्दी मुझे अपना मेहमान बनाकर ले गयी
मेहमान नवाज़ी ऐसी दी कि याद दिल में बस गयी
इंसान मैं आम था मुझको वो नवाब बनाकर ले गयी
लखनऊ शताब्दी मुझे ख़ास मेहमान बनाकर ले गयी
ठीक समय पर खाना पानी चाय वाय पिलाते ले गयी
इंसान मैं आम था मुझको वो नवाब बनाकर ले गयी
लखनऊ शताब्दी मुझे ख़ास मेहमान बनाकर ले गयी
साफ़ सफाई ऐसी थी कि मेरी आँखें देखती रह गयीं
इंसान मैं आम था मुझको वो नवाब बनाकर ले गयी
लखनऊ शताब्दी मुझे ख़ास मेहमान बनाकर ले गयी
घर से कहीं बढ़कर सम्मान वो आवभगत से ले गयी
इंसान मैं आम था मुझको वो नवाब बनाकर ले गयी
लखनऊ शताब्दी मुझे ख़ास मेहमान बनाकर ले गयी
शुक्रिया भारतीय रेल अच्छी याद तुम देकर गयी
इंसान मैं आम था मुझको वो नवाब बनाकर ले गयी
लखनऊ शताब्दी मुझे ख़ास मेहमान बनाकर ले गयी
