डिप चाय की पुड़िया (Dip Chay Ki Pudiya)

गरम पानी की प्याली में
चलती रेल गाड़ी में
डिप चाय की पुड़िया को
उसने उलट पुलट डुबोया
उठा पटक इधर उधर घोला
फिर जम के निचोड़ा

दूध चीनी डालकर
वो चाय पी तो गया मगर
सोचने लगा यकायक
कि जिस तरह उसने
पुड़िया को डुबोया है
उलट पुलट घोला है
फेंकने लायक छोड़ा है

ज़िन्दगी ने भी तो उसे
डिप चाय कि पुड़िया
बना ही तो दिया है
रोज़मर्रा के झमेलों में
कंठ तक डुबोया है
अव्वल आने की दौड़ में
शामिल भीड़ में घोला है
बिखर जाने की हद तक
जम के निचोड़ा है

हर कोई बस दुसरे
के कंधे पर सवार है
हर छोटी मछली
बड़ी मछली का शिकार है

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