मेरे नगमों की पहचान तुमसे है
इनकी धड़कनों में जान तुमसे है
इज़हार-ए-ज़ज़्बात चाहे मेरे हैं
इनके तेवर कद्रदान तुमसे हैं
राह-ए-सफर में गुम था मैं तो
मंज़िल से भटक गया था मेँ तो
आह दर्द की गूंजती है नग़मों मेँ
इसकी दवा का एहसान तुमसे है
तुमने थामा ज़ज़्बात बह निकले
दिल की परतों से रिसकर निकले
हर ज़ुबाँ पर गूंजते रहते हैं जो
मेरी लिखावट में तराश तुमसे है
आलम है तुम्हें ढूंढते हैं गीत मेरे
तुम न पढ़ो तो न सजेंगे मीत मेरे
मेरे कोशिशों को सराहते रहना
वक्त मेहरबान मुझ पर तुमसे है
