वो कायर शख्स (Woh Kayar Shakhs)

वो शख्स आइने में जो डरा करता था
वो जो अलग था मैं बहादुर बच्चा था
वो डरता था मैं भिड़ जाया करता था
वो चुप रहता मैं अड़ जाया करता था
वो सहता रहता था, मैं टकरा जाता था
वो सहमा रहता था, मैं गरमा जाता था
मैं हकीकत में वो ख्वाबों में जीता था

गुज़रते वक्त ने मगर फैसला कर दिया
कौन सही था हम में साबित कर दिया
वो डरपोक मुझसे ज्यादा कामयाब है
ऊंची हैसियत उसकी मुझ से आज है
मुझसे वो बात नहीं करता कतराता है
राह में नजरें बचाकर निकल जाता है
एक बार मिला था किसी पार्टी में मुझे
एक शेर सुनाकर दहला गया वो मुझे
हम तो दरिया थे राह अपनी बना ली
आप पत्थर रहे जनाब टकराते रह गए
कुछ भी हो मगर डरना मुझे मंजूर नहीं
शेर बेशक भूखा हो खाएगा घास नहीं
वो शख्स आइने में रखता ऊंचे ख्वाब है
बंदे के चेहरे पर एक अलग रुवााब है
वो शख्स आइने में जो डरा करता था
वो अलग था मैं तो बहादुर बच्चा था

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *