ख़फ़ा वो ख़फ़ा हम (Khafa Wo Khafa Ham)

कुछ  गलत हम हुए कुछ अंदाज़ गलत हो गए
हसरतें  जब   टूटी   अलफ़ाज़   गलत  हो  गए
रफ्ता-  रफ्ता  दरमियाँ   यूँ   फ़ासले  बढ़ते गए
एहले सफ़र जो थे हमसफ़र अजनबी से हो गए

ख्वाब थे  जिनके  सजाये भूल अपनी चाँद रातें
खामोश हैं अब जिनकी ख़तम होती थी न बातें
बस   पशेमा   ज़िन्दगी  है  और घबराएं से हम
उनकी   आमद  ढूंढते  है मुन्तज़िर हम हो गए

कैसे   उनका   हाल   पूछे   रूबरू   कैसे रहे
रूठ   बैठे हैं  वो  हमसे  और ख़फ़ा कैसे करें
दिल मगर कम्बख्त नाज़ुक की यही है तिश्नगी
वक़्त के धुंधले सफ़र में फ़िर मिले जो खो गये

वक़्त   बीता  उम्र   गुज़री   मिट गयी यादें सभी
ज़ख्म   अपनों  से   मिले जो टीस उनमें है अभी
चाक दामन खाक अरमानों का बस बाकी सफ़र
चंद   साँसों   के   अलावा   क़र्ज़   सारे  चुक गए

कुछ  गलत हम हुए कुछ अंदाज़ गलत हो गए
हसरतें  जब   टूटी   अलफ़ाज़   गलत  हो  गए
रफ्ता-  रफ्ता  दरमियाँ   यूँ   फ़ासले  बढ़ते गए
एहले सफ़र जो थे हमसफ़र अजनबी से हो गए

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