बाबूमोशाय,
जिंदगी और मौत ऊपरवाले के हाथ हैं जहांपनाह।
उसे ना तो आप बदल सकते हैं ना मैं।
हम सब तो रंगमंच की कठपुतलियां हैं,
जिनकी डोर ऊपरवाले की उंगलियों में बंधी है।
कब, कौन, कैसे उठेगा ये कोई नहीं बता सकता है
हा… हा… हा…
मैं अपनी जिंदगी का हीरो हूँ
काश जिंदगी फिल्म का परदा होती
नाटक तो अब भी होते हैं
बस मैने कई हीरोइनें बदल ली होतीं
काश जिंदगी फिल्म का परदा होती
सारे मुश्किल काम बॉडी डबल से करवाता
अपने हिसाब से कैमरा एंगल सेट करवाता
लाइफ मौज मस्ती में कट गई होती
काश जिंदगी फिल्म का परदा होती
मुंह उठाकर कभी भी ऑफिस चले जाता
बॉस साइड कलाकार मेरा एहसान मनाता
विलेन जितने होते धुलाई कर दी होती
काश जिंदगी फिल्म का परदा होती
हीरो के लिए सीन सेट हो जाते हैं
बूढ़े हीरो शटर के नीचे से फिसल आते हैं
मैंने भी एवरेस्ट से छलांग लगा दी होती
काश जिंदगी फिल्म का परदा होती
जिंदगी कोई पर्दा नहीं हकीकत है
हर शै की चुकानी भारी कीमत है
हीरो आप मगर आप सुपर मैन नहीं
हनुमैन बेटमैन या स्पाइडर मैन नहीं
यहां हर सीन खुद ही जमाना पड़ता है
सेट और कैमरा एडजस्ट नहीं होता है
मौत मगर कितनी आसां हो गयी होती
‘दि एन्ड’ से अगर ट्रेजेडी हटा दी होती
काश जिंदगी फिल्म का परदा होती
बाबू मोशाय,
ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं
