सरकारी ऑफिस में इंटरव्यू
मनुआ चिंता में बैठा है क्यूँ
बारह बजे ही तो बुलाया था
ढाई बज गए है तो क्या बंधू
बार-बार हल्का होकर जाऊँ
हल्का होऊँ पानी पीने जाऊं
तू ही बता, धीरज कैसे बँधाऊँ
भूख प्यास से भी व्याकुल हूँ
सरकारी ऑफिस में इंटरव्यू
मन मच रही खलबली, बंधू
मन में मचती खलबली, बंधू
डेस्क पर मैं विराजमान हूँ
चाय-पानी की भी पूछ नहीं
लंच टाइम निकल चुका है
हमको सताती है भूख बड़ी
जी चाहता है उठकर चल दूँ
दिल कहता है थम जा बच्चू
सरकारी ऑफिस में इंटरव्यू
मन मच रही खलबली, बंधू
दरवाजे पर आहट हुई, लो
लगा, बात बनेगी अब तो
क्या पता था द्वार पे साईं
झूमती कुतिया की परछांई
टुकुर टुकुर वह देखती है
मुंह पर जीभ फेर लेती है
मेरे भूखे पेट को ऐसे वो
नयी सांत्वना दे देती है
अकेला नहीं है तू प्राणी
भूख हमें भी कचोटती है
तेरी करुणा मुझसे बड़ी है
बातें सटीक करती है तू
शुभ संकेत की वर्षा है तू
शायद हो जाए अब इंटरव्यू
सरकारी ऑफिस में इंटरव्यू
थैंक यू साहब, ख़तम इंटरव्यू
