वाह रे भगवन!(WRB)

पांच फीट तीन इंच?

पांच फीट तीन इंच!

क्या है ये भगवन?

नहीं!

क्या है ये भगवन?

मिट्टी खत्म हो गई थी क्या

जब पहुंचे थे हम?

या लेट लतीफ़ थे

देर से पहुंचे थे हम?

…भगवन?

हाइट बढ़ा देता थोड़ी

शुरू होते ही न झट

ख़त्म होते हम

क्या हिसाब है भगवन?

पांच फीट तीन इंच?

दिल से मालामाल हैं

जेब भी ख़ासी भारी है

पर इनकी कीमत तूने

लम्बाई से क्यों निकाली है

लंबा कोई गुज़रे

तिलमिला जाते हैं हम

क्यों है ये भगवन?

मम्मी पापा छोटे थे

हम सब्र कर लेते थे

आध एक इंच के लिए

जूते ऊँचे लेते थे

मगर!

ठिगनों के बच्चे लम्बे!

देखे पगला गए हम!

हद है भगवन!

एक बात में सच

तारीफ़ तेरी है

बीवी लंबी तूने

बोनस में दी है

झुक के सदा बोले

गर्व से फूल जाते हैं हम

वाह रे भगवन!

कॉम्प्लिमेंट्स फॉर दिस!

थैंक यू भगवन!

वर्ना…

दिस इज़ नॉट फेयर!

क्या है ये भगवन!

सामान ऊँचा हो

बेबस रह जाते हैं हम

स्टूल के मोहताज़ अक्सर

हो जाते हैं हम

बस में लटका हैंडल

नहीं पकड़ पाते हैं

स्कूटी पे पीछे नहीं

बैठ पाते हैं

देख रहे हो भगवन?

और सुनना है?

धुले कपड़े तार से

नहीं ला पाते हैं

हाथी संग सेल्फी

नहीं ले पाते हैं

नेताओं को हार

नहीं पहना पाते

घोड़े पे सवार

नहीं हो पाते हैं

अब बोलो भगवन?

अरे…

घोड़े से याद आया!

शादी की घोड़ी हमारी

इतनी ऊँची थी कि…

पीछे बारातियों के पटाखे

छोड़ने पे बिदकती थी

अपनी जान का जोखिम

उसके बाल पकड़कर

बचाते हुए गए थे!

और…

और…

साथ में एक लम्बा दोस्त

कहता जा रहा था—

“चिंता मत कर यार,

अगर ज़्यादा उछली

तो घोड़ी को ही गिरा दूंगा!”

क्या है ये भगवन?

ये डायलॉग हम भी तो

कह सकते थे!

व्हाट इज़ दिस, गॉड?

पांच फीट तीन इंच?

पांच फीट तीन इंच!

अब तो आदत है…

मगर कभी-कभी

आईना देखकर लगता है—

इत्ती सी मिट्टी और डाल देता

तो तेरा क्या जाता…

…भगवन?

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