मेरी सैलरी तू बैंक में जिस रोज़ आ जाती है
अरमानों को मेरे तू नए पंख देकर जाती है
बिजली बिल, पानी बिल पेट्रोल पॉकेट मनी
सारे खर्चों का बोझ कुछ कम कर जाती है
मेरी सैलरी तू बैंक में जिस रोज़ आ जाती है
अरमानों को मेरे तू नए पंख देकर जाती है
डीए एचआरए एलटीसी टीए और इन्क्रीमेंट
ये बढ़ जाएँ तो बढ़ जाता है मेरा सेंटीमेंट
मेरी फॅमिली दिन रात बस गुण तेरे गाती है
यारों रिश्तेदारों में बस तू ही शान बनाती है
मेरी सैलरी तू बैंक में जिस रोज़ आ जाती है
अरमानों को मेरे तू नए पंख देकर जाती है
पैसा सब कुछ नहीं बिन इसके भी कुछ नहीं
मास्टर कार्ड वीज़ा कार्ड तेरे बिन चलते नहीं
मॉलवॉल में यूपीआई तेरे दम से हो पाती है
कमाई तेरे ऊपर जो आये चांदी हो जाती है
मेरी सैलरी तू बैंक में जिस रोज़ आ जाती है
अरमानों को मेरे तू नए पंख देकर जाती है
बिजली बिल, पानी बिल पेट्रोल पॉकेट मनी
सारे खर्चों का बोझ कुछ कम कर जाती है
