हे मॉम!
ज़रा तमीज़ से पेश आओ, GenZ के चोंचले बंद करो,
जो कहना है कहो, पहले मम्मी कहकर बात करो।
“ओके मम्मी! बताओ ज़रा, मैं कहाँ से आई?
क्यों God ने तुमसे बेटर मम्मी नहीं दिलाई?”
मम्मी बोली—“चुप बदतमीज़!
मैं क्यों तुझे ले आई थी?
परियों से कुछ और माँगती,
जिन्होंने तू भिजवाई थी!”
“अच्छा हूँ…
तो माँ, वीरेंद्र कौन है?
रोज़ चला आता है हमारे घर।
डिलीवरी मैन है?
रोज़ सामान ले आता है?”
“चुप पगली! वो मेरे पति और तेरे पापा हैं,
सामान क्या—घर का खर्चा यही चलाते हैं।
तमीज़ से बोला कर,
ये GenZ ही स्यापा है!”
“अरे मम्मी! ये पेट पे निशान कैसे आया?
ऐसा लगता है कि पापा ने तुमको मारा!”
“चुप बेशर्म! ये तो जब तू मेरे घर आई थी,
मेरे पेट पर एक बिल्ली पंजा मार गई थी।”
GenZ के सवाल तौबा—दिल दहलाते हैं,
हम तो भैया बस मुँह छुपाते रह जाते हैं।
“जा! जा के पढ़ाई कर ले, दिमाग न खा,
जा दरवाज़ा खोल—देख बाहर कौन आया।”
“मम्मी! बाहर मिल्कमैन भैया जी आए हैं,
लोहे की बड़ी वाली बोतल में दूध लाए हैं।”
माँ बोली—“क्या करूँ पगली को, ये भी नहीं पता है,
कहती है दूध भैंस से नहीं,
बोतल में भैया देने आता है!”
“ओके…
मम्मी, ये तो बताओ—कंडोम क्या होता है?
सामने वाली आंटी को ये भी नहीं पता है!”
“चल भाग यहाँ से, बेशर्म! चिमटा खाएगी,
दो थप्पड़ लगाऊँगी तो रोती जाएगी!”
“मत बताओ मम्मी, मैं नेट से देख लूँगी,
अब से तुमसे कोई सवाल नहीं करूँगी!”
