Metro City

चलो कुछ तो बात करो
गर मुझको अपना समझो
ये तो कहो इन आँखों को
आखिर क्यों भिगोती हो

कुछ कहना चाहती हो
होठ क्यों सी लेती हो
भरोसा तुम्हें अगर है तो
मुझे इतना हक तो दो

मुझे लगता है बेबी
तुम खोई खोई सी हो
आँखें भी बोझिल है
सोयी सोयी सी हो

क्या बतलाऊँ मैं तुमको
अज़ीज़ तुम मेरे ही हो
मेरे हर राज से देखो न
तुम वाकिफ तो हो

तो बोलो क्या दुख है
क्यों तुम परेशां हो
तुम्हारा ग़म उठाने का
मुझे एक मौका दे दो

तुम इतना कहते हो तो
चलो कह देती हूँ तुमको
मेरी चप्पल काट रही है
तुम एक मदद कर दो

मेट्रो से न जा पाउंगी
अपनी गाडी से छोड़ दो
चलते हैं चलो अभी
एक कॉफी पिलवा दो

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