मेहनतकश (Mehnatkash)

खुद की खुद्दारी पर खैर करे खुदा भी
क़दमों में ज़मीन मुट्ठी में आसमान हो
मेहनत की खुराक से हौसले हों बुलंद
हर सपने में बसा हकीकत का रंग हो

महान है जिसने मिट्टी को सोना किया
खेतों में पसीना अपने नाम कर लिया
चलता जाए बिना थके किसी राही सा
ज़िन्दगी को उसने नया मुकाम दिया

महान है मज़दूर किसान और जवान
मेहनतकश है जो हर इंसां महान है
मुसीबतों से जो कभी हैं घबराते नहीं
ऐसे मलंगों की तो अपनी पहचान है

तूफानों से लड़ने का अपना वादा है
सपनों की खातिर जीने का इरादा है
हर मुश्किल को दिखाते हैं जो ठेंगा
आसमानों तक को उन्होने लांघा है

मिट्टी से अंबर तक की है ये कहानी
उस शख्स ने छोड़ी है अपनी निशानी
खुद्दारी के पंखों से ऊंची परवाज़ ली
ज़मीं पर झुकाते वो हदें आसमां की

महान है मज़दूर किसान और जवान
मेहनतकश है जो हर इंसां महान है
मुसीबतों से जो कभी हैं घबराते नहीं
ऐसे मलंगों की तो अपनी पहचान है

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